- नई दिल्ली: भारतीय सेना ने एक viral press conference video पर सख्त सफाई दी है।
- प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।
- इसमें कुछ लोग सेना की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
नई दिल्ली: भारतीय सेना ने एक viral press conference video पर सख्त सफाई दी है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इसमें कुछ लोग सेना की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सेना का कहना है कि यह मिसलीडिंग प्रोपगैंडा (misleading propaganda) है।
वीडियो में कौन हैं लोग?
वीडियो में दिखाए गए चार लोगों के नाम हैं – चंदू चव्हाण (Chandu Chavan), हरेंद्र यादव (Harendra Yadav), पी. नरेंद्र (P Narender) और शंकर सिंह गुज्जर (Shankar Singh Gujjar)।

भारतीय सेना (Indian Army) के आधिकारिक बयान के मुताबिक, चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र को अनुशासनहीनता (indiscipline) और असैनिक आचरण (unsoldierly conduct) के लिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। जबकि शंकर सिंह गुज्जर एक डेजर्टर (deserter) है, जिसके खिलाफ सैन्य और सिविल कोर्ट में कार्रवाई चल रही है।
सेना का पूरा आधिकारिक बयान
एडीजीपीआई ने 22 मई 2026 को जो बयान जारी किया, उसमें साफ कहा गया:”एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया जा रहा है, जिसका मकसद IndianArmy की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
वीडियो में दिखाए गए चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र को अनुशासनहीनता और असैनिक आचरण के आधार पर सेवा से बर्खास्त किया गया था। चौथा व्यक्ति शंकर सिंह गुज्जर डेजर्टर है और उसके खिलाफ सैन्य व सिविल कोर्ट में अनुशासनिक कार्रवाई चल रही है।
अफवाहों से बचें#FakeAlert #Beware
A press conference video is being circulated across media and social media platforms with an attempt to malign the image of the #IndianArmy.
It is reiterated that the individuals seen in the video, namely Chandu Chavan, Harendra Yadav and P… pic.twitter.com/IJfWoWj9Zo
— ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) May 22, 2026
ये व्यक्ति अपनी गलतियों से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर फेक, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक (fake, malicious and misleading) कहानियां फैला रहे हैं। नागरिकों से अपील है कि ऐसी प्रोपगैंडा का शिकार न बनें और मिसइनफॉर्मेशन (misinformation) से सतर्क रहें।”यह बयान सितंबर 2024 के पुराने अलर्ट का फॉलो-अप है, जिसमें चंदू चव्हाण और हरेंद्र यादव पर पहले भी चेतावनी दी गई थी।
क्यों फैला रहे हैं ये लोग फेक वीडियो?
ये पूर्व सैनिक अपनी बर्खास्तगी और अनुशासनहीनता को छिपाने के लिए सेना की इमेज (Army image) को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। सेना ने कहा कि ऐसे तत्व देश की एकता और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान को कमजोर करना चाहते हैं।
चंदू चव्हाण का पुराना मामला भी सामने आया है, जहां वे 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक के समय अनुशासनहीनता के आरोप में शामिल थे। ऐसे तत्व देश की राष्ट्रीय सुरक्षा (national security) और सशस्त्र बलों के सम्मान को कमजोर करने की कोशिश करते हैं।
इतिहास में क्या हुआ?
चंदू चव्हाण 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक के समय सीमा पार चले गए थे। पाकिस्तान ने उन्हें वापस किया, लेकिन बाद में अनुशासनहीनता के लिए उन्हें कोर्ट मार्शल हुआ। सेना के अनुसार, उन्होंने कई बार नियम तोड़े और काउंसलिंग के बावजूद सुधार नहीं किया।

इसी तरह अन्य व्यक्तियों पर भी गंभीर आरोप हैं। सेना हर समय जवानों के कल्याण के लिए काम करती है, लेकिन अनुशासन भंग करने वालों को बर्दाश्त नहीं करती।
सोशल मीडिया पर फेक वीडियो का खतरा
आजकल सोशल मीडिया (social media) पर एक वीडियो मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। इससे पहले कि सच्चाई सामने आए, गलत धारणा बन जाती है। भारतीय सेना देश की रक्षा के लिए दिन-रात काम करती है। जवानों का मनोबल बनाए रखना बहुत जरूरी है। ऐसे फेक वीडियो युवाओं और आम नागरिकों के मन में संदेह पैदा कर सकते हैं।
जनता से अपील
भारतीय सेना ने सभी नागरिकों से कहा है कि #FakeAlert और #Beware जैसे टैग्स के साथ फैल रही खबरों पर भरोसा न करें। आधिकारिक स्रोतों – adgpi या SpokespersonMoD से ही जानकारी लें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
देश में राष्ट्रीय सुरक्षा (national security) के समय ऐसे फर्जी वीडियो युवाओं और जवानों के मनोबल को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय सेना हमेशा से देश की रक्षा की ढाल रही है। हमें मिलकर फेक न्यूज (fake news) के खिलाफ लड़ना चाहिए।




