- नई दिल्ली: Strait of Hormuz संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है।
- ईरान ने Indian Oil Tankers को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
- यह खबर S Jaishankar और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) की बातचीत के बाद आई है।
नई दिल्ली: Strait of Hormuz संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने Indian Oil Tankers को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह खबर S Jaishankar और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) की बातचीत के बाद आई है। US-Israel-Iran War के 13 दिनों में जब दुनिया तेल संकट से जूझ रही है, तब भारत की कूटनीति ने एक बार फिर चमत्कार कर दिखाया।
हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का वैश्विक महत्व क्या है?
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है। यहां से रोजाना 20 मिलियन बैरल तेल और LNG गुजरता है, जो ग्लोबल ऑयल ट्रेड का करीब 21% है। Indian Oil Tankers के लिए यह रूट भारत की 85% तेल आयात का मुख्य द्वार है। US-Israel-Iran War शुरू होने के बाद ईरान ने अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के लिए तेल निर्यात बंद कर दिया। कई जहाजों पर हमले हुए, तेल की कीमतें 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। लेकिन भारत के लिए यह रास्ता खुला रहा।

ईरान-भारत कूटनीति की सफलता: Jaishankar-Araghchi Talks
S Jaishankar और अब्बास अरागची की यह तीसरी बातचीत थी। दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर जोर दिया। नतीजा? दो भारतीय Indian Oil Tankers – पुष्पक (Pushpak) और परिमल (Parimal) – सुरक्षित गुजर चुके हैं। भारत टुडे और एनडीटीवी जैसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्पष्ट रूप से इन टैंकरों को अनुमति दी। हालांकि एक ईरानी स्रोत ने कुछ रिपोर्ट्स का खंडन किया, लेकिन भारतीय मीडिया और सरकारी सूत्रों ने राहत की पुष्टि की है।
यह कूटनीति भारत की Energy Security India को मजबूत करती है। US-Israel-Iran War में थाईलैंड फ्लैग्ड जहाज पर हमला हुआ, कई भारतीय जहाज फंस गए। लेकिन S Jaishankar की पहल से भारत अलग खड़ा रहा।
भारत पर संकट का असर: 28 जहाज फंसे, तेल कीमतें आसमान छू रही
Strait of Hormuz ब्लॉकेड के कारण 28 भारतीय फ्लैग्ड जहाज पर्सियन गल्फ में फंसे हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक हैं। इनमें से 24 जहाज स्ट्रेट के पश्चिम में और 4 पूर्व में हैं। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, संपत्ति का मूल्य 100 अरब रुपये से ज्यादा है। Indian Oil Tankers पर हमलों से LPG और क्रूड सप्लाई प्रभावित हुई। ईरान ने चेतावनी दी – “अमेरिका या सहयोगियों के लिए एक लीटर तेल भी नहीं गुजरेगा”।

लेकिन भारत ने रणनीति बदली। रूस से तेल आयात बढ़ाया, वैकल्पिक रूट्स अपनाए और कूटनीति से Strait of Hormuz में राहत हासिल की। तेल मंत्री और विदेश मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयीय बैठक में 70% आयात अब हॉर्मुज के बाहर से हो रहा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की रणनीति
Energy Security India आज सबसे बड़ा मुद्दा है। हम 85% तेल आयात करते हैं। Strait of Hormuz पर निर्भरता घटाने के लिए भारत क्लीन एनर्जी, रिन्यूएबल और रूस-मध्य पूर्व विविधीकरण पर जोर दे रहा है। US-Israel-Iran War ने साबित कर दिया कि फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता खतरनाक है। लेकिन S Jaishankar की मिडिल ईस्ट डिप्लोमेसी ने तत्काल राहत दी।

सरकार ने कहा – “हम सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।” 37 जहाज फंसने की खबरें भी आईं, लेकिन अब दो टैंकरों का सफल ट्रांजिट नई उम्मीद जगाता है। तेल कीमतें 200 डॉलर तक पहुंचने की आशंका थी, लेकिन भारत के प्रयासों से बाजार स्थिर हो रहा है।
हॉर्मुज संकट से सबक: भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
यह घटना दिखाती है कि भारत किसी भी गुट में नहीं बंधा। Iran India Relations मजबूत हैं, जबकि अमेरिका-इजराइल के साथ भी संबंध अच्छे। S Jaishankar की “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति काम कर रही है। ईरान ने स्पष्ट कहा – भारतीय टैंकर सुरक्षित रहेंगे। यह भारत की कूटनीतिक जीत है।
निष्कर्ष: भारत की जीत, दुनिया को सबक
Strait of Hormuz संकट अभी खत्म नहीं हुआ, लेकिन भारत ने अपनी Energy Security India को बचाया। Indian Oil Tankers अब सुरक्षित हैं, तेल सप्लाई जारी रहेगी। S Jaishankar की मेहनत और मोदी सरकार की दूरदर्शिता ने एक बार फिर साबित किया – भारत विश्व पटल पर मजबूत कदम रख रहा है।
यह राहत सिर्फ दो टैंकरों की नहीं, पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों की है। आगे भी कूटनीति और विविधीकरण से हम संकटों से निपटेंगे। Strait of Hormuz जैसे चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने का समय आ गया है। भारत जागरूक और तैयार है!




