Italy, 6 नवंबर 2025, शाम 10:20 IST: इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने आज एक सनसनीखेज खबर का जवाब दिया है, जिसमें ला रिपब्लिका (La Repubblica) ने दावा किया था कि पलाज़ो चीगी (Palazzo Chigi) में निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों ने बिना हेलमेट के काम किया।
यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद मेलोनी ने इसे झूठा (False) करार देते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। आइए जानते हैं कि इस विवाद की पूरी कहानी क्या है और इसने कैसे राजनीतिक बहस को हवा दी है।
ला रिपब्लिका का दावा: सुरक्षा मानकों की अनदेखी?
ला रिपब्लिका ने 6 नवंबर 2025 को एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें पलाज़ो चीगी की एक तस्वीर शामिल थी। इस तस्वीर में मजदूरों को ऊंचे स्कैफोल्डिंग (Scaffolding) पर बिना सुरक्षा हेलमेट के काम करते देखा गया। समाचार पत्र ने सुझाव दिया कि यह इतालवी सरकार (Italian Government) की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला हो सकता है, जो पलाज़ो चीगी को किराए पर लेती है, जो प्रधानमंत्री का आधिकारिक कार्यालय है। इस खबर ने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
जॉर्जिया मेलोनी का जवाब: सच्चाई क्या है?
प्रधानमंत्री मेलोनी ने एक्स (X) पर पोस्ट के जरिए इस दावे को खारिज कर दिया।
In merito all’articolo pubblicato in data odierna dal quotidiano “La Repubblica”, dal titolo “Gli operai al lavoro senza casco sui ponteggi di Palazzo Chigi”, la Presidenza del Consiglio dei Ministri intende precisare che i lavori di ristrutturazione dell’edificio di via… pic.twitter.com/IWDebKvXOx
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) November 6, 2025
उन्होंने स्पष्ट किया कि via dell’Impresa पर दिखाए गए निर्माण कार्य सरकारी संपत्ति से संबंधित नहीं हैं। मेलोनी के अनुसार, पलाज़ो चीगी का यह हिस्सा निजी मालिकाना हक वाली संपत्ति है, जिसे वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए किराए पर दिया गया है। उन्होंने कहा, “ये काम सरकार द्वारा नहीं कराए गए हैं, और हमने तुरंत इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की है।”

मेलोनी ने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार कामगारों की सुरक्षा (Workers’ Safety) को लेकर गंभीर है। उन्होंने हाल ही में मंजूर किए गए डिक्री-लॉ 159/2025 का हवाला दिया, जो कार्यस्थल सुरक्षा (Workplace Safety) को मजबूत करने के लिए नई नीतियां, निरीक्षण, प्रशिक्षण, और सुरक्षित कंपनियों के लिए प्रोत्साहन लाता है। यह कदम 31 अक्टूबर 2025 को मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत हुआ था।
विवाद की जड़: गलत सूचना या साजिश?
इस घटना ने इतालवी मीडिया (Italian Media) और सरकार के बीच तनाव को उजागर किया है। मेलोनी ने ला रिपब्लिका पर झूठी खबरें (Fake News) फैलाने का आरोप लगाया, जबकि उनके समर्थकों ने अखबार को “वामपंथी प्रचार” (Leftist Propaganda) करार दिया।
दूसरी ओर, कुछ आलोचकों का मानना है कि अगर यह खबर न प्रकाशित होती, तो शायद सुरक्षा उल्लंघन की ओर ध्यान नहीं जाता।
एक्स पोस्ट्स में, उपयोगकर्ताओं ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ ने मेलोनी का समर्थन किया, जैसे @lucianodanna ने लिखा, “ला रिपब्लिका हमेशा झूठ फैलाती है।” वहीं, @francesco_zerbi ने तंज कसा, “बिना इस लेख के आप सुरक्षा की चिंता नहीं करतीं।”
पलाज़ो चीगी का इतिहास और वर्तमान स्थिति
पलाज़ो चीगी, जो 17वीं सदी में बनाया गया था, इतालवी सरकार का प्रमुख कार्यालय है। यह इमारत निजी मालिकाना हक वाली है और सरकार इसे किराए पर लेती है। वेब स्रोतों के अनुसार, इसकी वास्तुशिल्पीय सुंदरता के साथ-साथ इसके रखरखाव को लेकर भी चर्चा होती रही है। हाल के वर्षों में, इमारत के कुछ हिस्सों में नवीकरण कार्य चल रहे हैं, जो इस विवाद का आधार बने।
कामगारों की सुरक्षा: सरकार का रुख
मेलोनी का दावा है कि उनकी सरकार कार्यस्थल सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। डिक्री-लॉ 159/2025 के तहत, नियोक्ताओं के लिए जोखिम मूल्यांकन, प्रशिक्षण, और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। यह कदम यूरोपीय संघ के स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों (Health and Safety Regulations) के अनुरूप है और कार्यस्थल दुर्घटनाओं को कम करने का लक्ष्य रखता है।
आगे क्या?
यह विवाद इतालवी राजनीति (Italian Politics) और मीडिया के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ला रिपब्लिका अपने दावों का बचाव करेगी या माफी मांगेगी। साथ ही, सरकार की ओर से की गई शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
पलाज़ो चीगी सुरक्षा विवाद (Palazzo Chigi Safety Controversy) ने एक बार फिर सूचना की सटीकता (Accuracy of Information) और जिम्मेदार पत्रकारिता (Responsible Journalism) की जरूरत को रेखांकित किया है। मेलोनी की प्रतिक्रिया और उनकी सरकार की नीतियां इस मुद्दे पर उनकी प्रतिबद्धता दिखाती हैं, लेकिन जनता के बीच सवाल बने रहेंगे कि क्या यह एक गलतफहमी थी या जानबूझकर फैलाई गई खबर।
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